नात लिरिक्स

Ab Tangi-e-Daman Pe Na Ja Aur Bhi Kuchh Mang

अब तंगी-ए-दामाँ पे न जा और भी कुछ माँग

नात ख़्वान: अल्हाज यूसुफ़ मेमनशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अब तंगी-ए-दामाँ पे न जा और भी कुछ माँगहैं आज वो माइल-ब-'अता और भी कुछ माँग

हर-चंद के मौला ने भरा है तेरा कश्कोलकम-ज़र्फ़ न बन, हाथ बढ़ा और भी कुछ माँग

या सरवर-ए-दीं शाह-ए-'अरब रहमत-ए-'आलमदे कर तह-ए-दिल से ये सदा और भी कुछ माँग

सरकार का दर है दर-ए-शाहाँ तो नहीं हैजो माँग लिया माँग लिया और भी कुछ माँग

जिन लोगों को ये शक है करम उन का है महदूदउन लोगों की बातों पे न जा और भी कुछ माँग

उस दर पे ये अंजाम हुआ हुस्न-ए-तलब काझोली मेरी भर-भर के कहा और भी कुछ माँग

सुल्तान-ए-मदीना की ज़ियारत की दु'आ करजन्नत की तलब चीज़ है क्या और भी कुछ माँग

दे सकते हैं क्या कुछ कि वो कुछ दे नहीं सकतेये बहस न कर, होश में आ और भी कुछ माँग

है 'इश्क़-ए-नबी दौलत-ए-कौनैन का हासिलदरकार है क्या इस के सिवा और भी कुछ माँग

माना के इसी दर से ग़नी हो के उठा हैफिर भी दर-ए-सरकार पे जा और भी कुछ माँग

पहुँचा है जो इस दर पे तू रह-रह के, नसीर ! आजआवाज़ पे आवाज़ लगा और भी कुछ माँग

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