दिल में किसी को और बसाया न जाएगाज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा
वो खुद ही जान लेंगे, बताया न जाएगाहम से तो अपना हाल सुनाया न जाएगा
दिल में किसी को और बसाया न जाएगाज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा
हम को जज़ा मिलेगी मुह़म्मद से इश्क़ कीदोज़ख के आस पास भी लाया न जाएगा
दिल में किसी को और बसाया न जाएगाज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा
कहते थे ये बिलाल तशद्दुद पे कुफ्र केइश्क़-ए-नबी तो दिल से निकाला न जाएगा
दिल में किसी को और बसाया न जाएगाज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा
दोज़ख में मैं तो क्या ! मेरा साया न जाएगाक्यूं के रसूले-पाक से देखा न जाएगा
दिल में किसी को और बसाया न जाएगाज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा
रोशन रहेगा दाग़े-फ़िराक़े-शहे-उममये वो चराग़ है जो बुझाया न जाएगा
दिल में किसी को और बसाया न जाएगाज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा
मानेगा उन की बात ख़ुदा हश्र में नसीरबिन मुस्तफ़ा, ख़ुदा को मनाया न जाएगा
दिल में किसी को और बसाया न जाएगाज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा
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