नात लिरिक्स

Aa Gai Mustafa Ki Sawari | Aa Gayi Mustafa Ki Sawari

आ गई मुस्तफ़ा की सवारी

नात ख़्वान: ज़ोहैब अशरफ़ीशायर: मु'ईन ख़ान क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लोदे रहे हैं फ़रिश्ते सलामीतुम दुरूदों की माला बना लो

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लो

अपने मँगतों को वो पालते हैंवो भला किस को कब टालते हैं ?सदक़ा हसनैन और सय्यिदा काया नबी ! मेरी झोली में डालो

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लो

कर के ना'तों से हर-सू चराग़ाँयूँ मनाएँगे जश्न-ए-बहाराँ'आशिक़ो ! आमद-ए-मुस्तफ़ा हैदीप ख़ुशियों के हर-सू जला लो

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लो

बख़्त चमकेंगे इक दिन हमारेदेख लेंगे वो दिलकश नज़ारेआप को जो भी सब से हैं प्यारेउन के सदक़े में हम को बुला लो

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लो

जिन के हाथों में है उन का दामननाम-ए-अहमद है जिस दिल की धड़कनजो है पहचान हम 'आशिक़ों कीझूम कर उन का ना'रा लगा लो

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लो

पूरे हो जाएँगे उन के अरमाँकर रहे हैं वो बख़्शिश का सामाँजश्न-ए-मीलाद की बरक़तों सेअपने क़ल्ब-ओ-नज़र जगमगा लो

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लो

मिदहत-ए-मुस्तफ़ा ही के सदक़ेहैं, मु'ईन ! अपने सब काम बनतेहर घड़ी ज़िक्र हो मुस्तफ़ा काइस को अपना वज़ीफ़ा बना लो

आ गई मुस्तफ़ा की सवारीअपने घर को दियों से सजा लो

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