नात लिरिक्स

Mujh Ko Dar-Pesh Hai Phir Mubarak Safar, Qafila Phir Madine Ka Tayyar Hai

मुझ को दर-पेश है फिर मुबारक सफ़र, क़ाफ़िला फिर मदीने का तय्यार है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरी - असद रज़ा अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी

मुझ को दर-पेश है फिर मुबारक सफ़रक़ाफ़िला फिर मदीने का तय्यार हैनेकियों का नहीं कोई तोशा, फ़क़तहाए ! सर पर गुनाहों का अम्बार है

कोई सज्दों की सौग़ात है न कोईज़ोह्द-ओ-तक़्वा मेरे पास, सरकार ! हैचल पड़ा हूँ मदीने की जानिब मगरहाए ! सर पर गुनाहों का अम्बार है

जुर्म-ओ-इस्याँ पे अपने लजाता हुआऔर अश्क-ए-नदामत बहाता हुआतेरी रहमत पे नज़रें जमाता हुआदर पे हाज़िर ये तेरा गुनहगार है

तेरा सानी कहाँ ! शाह-ए-कौन-ओ-मकाँमुझ सा आसी भी उम्मत में होगा कहाँ !तेरे अफ़्व-ओ-करम का शह-ए-दो-जहाँ !क्या कोई मुझ से बढ़ कर भी हक़दार है ?

मुजरिमों को, शहा ! बख़्शवाता है तूअपनी उम्मत की बिगड़ी बनाता है तूग़म के मारों को सीने लगाता है तूग़म-ज़दों, बे-कसों का तू ग़म-ख़्वार है

ठोकरें दर-ब-दर कब तलक खाऊँ मैंफिर मदीने मुक़द्दर से जब आऊँ मैंकाश ! क़दमों में, सरकार ! मर जाऊँ मैंया नबी ! ये तमन्ना-ए-अत्तार है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।