नात लिरिक्स

Aaj Ashk Mere Naat Sunaein To Ajab Kya

आज अश्क मेरे नात सुनाएँ तो अजब क्या

नात ख़्वान: अल्हाज ख़ुर्शीद अहमदशायर: अदीब रायपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आज अश्क मेरे ना'त सुनाएँ तो अजब क्यासुन कर वो मुझे पास बुलाएँ तो अजब क्या

उन पर तो गुनहगार का सब हाल खुला हैइस पर भी वो दामन में छुपाएँ तो अजब क्या

मुँह ढाँप के रखना कि गुनहगार बहुत हूँमय्यत को मेरी देखने आएँ तो अजब क्या

दीदार के क़ाबिल तो नहीं चश्म-ए-तमन्नालेकिन वो कभी ख़्वाब में आएँ तो अजब क्या

दीदार के क़ाबिल तो कहाँ मेरी नज़र हैलेकिन वो कभी ख़्वाब में आएँ तो अजब क्या

न ज़ाद-ए-सफ़र है, न कोई काम भले हैंफिर भी मुझे सरकार बुलाएँ तो अजब क्या

वो हुस्न-ए-दो-'आलम हैं, अदीब ! उन के क़दम सेसहरा में अगर फूल खिल आएँ तो अजब क्या

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।