नात लिरिक्स

Faslon Ko Khudara Mita Do | Jaliyon Par Nigahen Jami Hain

फ़ासलों को ख़ुदारा मिटा दो | जालियों पर निगाहें जमी हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अदीब रायपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैंअपना जल्वा इसी में दिखा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोरुख़ से पर्दा अब अपने हटा दोअपना जल्वा इसी में दिखा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

एक मुजरिम सियाह-कार हूँ मैंहर ख़ता का सज़ा-वार हूँ मैंमेरे चारों तरफ़ है अँधेरारौशनी का तलबग़ार हूँ मैंइक दिया ही समझ कर जला दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

वज्द में आएगा सारा 'आलमहम पुकारेंगे, या ग़ौस-ए-आ'ज़मवो निकल आएँगे जालियों सेऔर क़दमों में गिर जाएँगे हमफिर कहेंगे कि बिगड़ी बना दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

ग़ौस-उल-आ'ज़म हो, ग़ौस-उल-वरा होनूर हो नूर-ए-सल्ले-'अला होक्या बयाँ आप का मर्तबा हो !दस्त-गीर और मुश्किल-कुशा होआज दीदार अपना करा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

सुन रहे हैं वो फ़रियाद मेरीख़ाक होगी न बर्बाद मेरीमैं कहीं भी मरुँ, शाह-ए-जीलाँ !रूह पहुँचेगी बग़दाद मेरीमुझ को परवाज़ के पर लगा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

हर वली आप के ज़ेर-ए-पा हैहर अदा मुस्तफ़ा की अदा हैआपने दीन ज़िंदा किया हैडूबतों को सहारा दिया हैमेरी कश्ती किनारे लगा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़िक्र देखो, ख़यालात देखोये 'अक़ीदत ये जज़्बात देखोमैं हूँ क्या ! मेरी औक़ात देखोसामने किस की है ज़ात देखोऐ अदीब ! अपने सर को झुका लोजालियों पर निगाहें जमी हैं

फ़ासलों को ख़ुदा-रा ! मिटा दोजालियों पर निगाहें जमी हैं

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