नात लिरिक्स

Aaqa Tumhare Dar Par Aana Achchha Lagta Hai

आक़ा तुम्हारे दर पर आना अच्छा लगता है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आक़ा तुम्हारे दर पर आना अच्छा लगता हैआँख में ख़ाक-ए-तयबा लगाना अच्छा लगता है

गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में हाल-ए-दिल अपनारो रो कर आक़ा को सुनाना अच्छा लगता है

बैठ के जन्नत की क्यारी में रोती आँखों कोछुप छुप कर मिम्बर पे उठाना अच्छा लगता है

बैठ के 'आशिक़ की संगत में ना'तें पढ़ पढ़ करयाद में तेरी रोना रुलाना अच्छा लगता है

बैठ के 'आशिक़ की महफ़िल में ना'तें पढ़ पढ़ करयाद में तेरी रोना रुलाना अच्छा लगता है

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