नात लिरिक्स

Jo Lamhe The Sukoon Ke Sab Madine Mein Guzaar Aaye

जो लम्हे थे सुकूँ के सब मदीने में गुज़ार आए

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अदीब रायपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो लम्हे थे सुकूँ के सब मदीने में गुज़ार आएदिल-ए-मुज़्तर ! वतन में अब तुझे कैसे क़रार आए

यही तो सूरत-ए-वज्ह-ए-क़रार-ए-ज़िंदगानी हैबुलाएँ तो क़रार आए, वो आएँ तो क़रार आए

ख़ज़ाँ को हुक्म है दाख़िल न हो तयबा की गलियों मेंइजाज़त है नसीम आए, सबा आए, बहार आए

ये बस्ती अहल-ए-दिल की और दीवानों की बस्ती हैगए जितने ख़िरद-नाज़ाँ वो दामन तार-तार आए

जबीं हो आस्ताँ पर, हाथ में रोज़े की जाली होये लम्हा ज़िंदगी में, ऐ ख़ुदा ! फिर बार बार आए

जबीं हो उन के दर पर, हाथ में रोज़े की जाली होये लम्हे ज़िंदगी में, ऐ ख़ुदा ! फिर बार बार आए

त'अय्युन मस्जिद-ओ-मेहराब का तयबा में क्या होताजहाँ नक़्श-ए-क़दम देखे वहीं सज्दे गुज़ार आए

क़लम जब से हुआ है ख़म, अदीब ! आक़ा की मिदहत मेंबड़े रंगीं हुए मज़मूँ, बड़े नक़्श-ओ-निगार आए

क़लम जब से हुआ ख़म ना'त-ए-अहमद में, अदीब ! अपनाबहुत रंगीं हुए मज़मूँ, बड़े नक़्श-ओ-निगार आए

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