नात लिरिक्स

Hazir Hain Hazir Hain Hazir Hain Hum | Labbaik Allahumma Labbaik

हाज़िर हैं हाज़िर हैं हाज़िर हैं हम | लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक

नात ख़्वान: ग़ुलाम फ़रीद साबरी और मक़बूल अहमद साबरीशायर: अदीब रायपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो तेरी रहमत का मुन्किर हो, वो मेरा दिल नहींमाँगना जिस को न आए, वो कोई साइल नहींऐ करम-परवर ! करम, मेरे गुनाहों पर न जारहम के क़ाबिल हूँ मैं, इन्साफ़ के क़ाबिल नहीं

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

लाइक़-ए-हम्द-ओ-सना तेरे सिवा कोई नहींसुनने वाला 'आसियों की इल्तिजा कोई नहींडूबतों को जो बना दे ना-ख़ुदा कोई नहींझोलियाँ भर दे जो सुन कर मुद्द'आ कोई नहींहाँ, सिवा तेरे सिवा तेरे सिवा कोई नहींतर हैं दामन भी हमारे और आँखें भी हैं नम

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

ले चली रहमत की जानिब लज़्ज़त-ए-त्वाफ़-ए-हरम'आसी-ओ-मिस्कीन-ओ-मुजरिम हो रहे हैं मोहतरमये तेरी शान-ए-करीमी, ये तेरा लुत्फ़-ओ-करमबढ़ रहे हैं तेरी जानिब तेरे बंदों के क़दममुद्द'आ तेरी रज़ा, तेरी ख़ुशी, तेरा करमइन तमन्नाओं का रखना, ऐ ख़ुदा-वंदा ! भरम

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

ये शरफ़ कि आदमी अल्लाह के घर जाएगाये शरफ़ कि पाक दामानों का रुत्बा पाएगाये शरफ़ कि हर ख़ता रब दरगुज़र फ़रमाएगाये शरफ़ कि दाग़ दामन से हर इक धुल जाएगाये शरफ़ कि रौज़ा-ए-शाह-ए-उमम पर जाएगाइस शरफ़ पर जान भी क़ुर्बान कर दें तो है कम

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

ये सफ़र हज का सफ़र बिगड़े बनाता है नसीबये सफ़र मख़्लूक़ को ख़ालिक़ से करता है क़रीबये सफ़र या'नी मरीज़ों से मुलाक़ात-ए-तबीबहो मुक़द्दर से अगर 'अरफ़ात का मैदाँ नसीबये दु'आ माँगो खड़े हो कर वहाँ पर, ऐ अदीब !हो ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा में नाम अपना भी रक़म

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लक

हाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हमहाज़िर हैं, हाज़िर हैं, हाज़िर हैं हम

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