नात लिरिक्स

Aaya Na Hoga Is Tarah Husn-o-Shabab Ret Par

आया न होगा इस तरह हुस्न-ओ-शबाब रेत पर

नात ख़्वान: ज़ुल्फ़िक़ार अली हुसैनीशायर: अदीब रायपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आया न होगा इस तरह हुस्न-ओ-शबाब रेत परगुलशन-ए-फ़ातिमा के थे सारे गुलाब रेत पर

जान-ए-बतूल के सिवा कोई नहीं खिला सकाक़तरा-ए-आब के बग़ैर इतने गुलाब रेत पर

जितने सवाल 'इश्क़ ने आल-ए-रसूल से किएएक से बढ़ के इक दिया सब ने जवाब रेत पर

'इश्क़ में क्या लुटाइए, 'इश्क़ में क्या बचाइएआल-ए-नबी ने लिख दिया सारा निसाब रेत पर

प्यासा हुसैन को कहूँ इतना तो बे-अदब नहींलम्स-ए-लब-ए-हुसैन को तरसा है आब रेत पर

तरसे हुसैन आब को मैं जो कहूँ तो बे-अदबलम्स-ए-लब-ए-हुसैन को तरसा है आब रेत पर

लज़्ज़त-ए-सोज़िश-ए-बिलाल, शौक़-ए-शहादत-ए-हुसैनजिस ने लिया यूँही लिया अपना ख़िताब रेत पर

आल-ए-नबी का काम था, आल-ए-नबी ही कर गएकोई न लिख सका, अदीब ! ऐसी किताब रेत पर

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