नात लिरिक्स

Yahi Mera Taruf Hai Gada-e-Mustafa Hoon Main

यही मेरा तआरुफ़ है गदा-ए-मुस्तफ़ा हूँ मैं

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: मुहम्मद साबिर सरदारउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

यही मेरा त'आरुफ़ है, गदा-ए-मुस्तफ़ा हूँ मैंसख़ी हसनैन का मँगता, फ़िदा-ए-मुर्तज़ा हूँ मैं

जितना दिया सरकार ने मुझ को, उतनी मेरी औक़ात नहींये तो करम है उन का वर्ना मुझ में तो ऐसी बात नहीं

ग़ौर तो कर, सरकार की तुझ पे कितनी ख़ास 'इनायत हैकौसर ! तू है उन का सना-ख़्वाँ, ये मा'मूली बात नहीं

मेरे कश्कोल में जो कुछ है ज़हरा पाक का सदक़ाइसी सदक़े से कुंबा पल रहा है, पल रहा हूँ मैं

उन के दरबार से जब भी मैं ने पंजतन के वसीले से माँगामुझ को ख़ैरात फ़ौरन मिली है, ख़ूब मेरे गुज़ारे हुए हैं

चाहते हो अगर नेक-नामी, आल-ए-ज़हरा की कर लो ग़ुलामीइन के सदक़े से ज़ाहिद नियाज़ी ! पुर-सुकूँ ग़म के मारे हुए हैं

इसी सदक़े से कुंबा पल रहा है, पल रहा हूँ मैं

यही मेरा त'आरुफ़ है, गदा-ए-मुस्तफ़ा हूँ मैं

न 'आबिद हूँ, न कोई पारसा, बस नाज़ है इतनामैं जब आवाज़ देता हूँ, वो कहते, आ रहा हूँ मैं

यही मेरा त'आरुफ़ है, गदा-ए-मुस्तफ़ा हूँ मैं

बड़ी सरकार का बंदा समझ कर 'इश्क़ के बंदेमुझे सरदार कहते हैं, हक़ीक़त में गदा हूँ मैं

यही मेरा त'आरुफ़ है, गदा-ए-मुस्तफ़ा हूँ मैं

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