नात लिरिक्स

Yaad-e-Mustafa Aisi Bas Gai Hai Seene Mein

याद-ए-मुस्तफ़ा ऐसी बस गई है सीने में

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

याद-ए-मुस्तफ़ा ऐसी बस गई है सीने मेंजिस्म हो कहीं अपना, दिल तो है मदीने में

याद-ए-मुस्तफ़ा ऐसी बस गई है सीने मेंजिस्म तो यहीं है अपना, दिल तो है मदीने में

मेरे मदनी आक़ा का घर तो है मदीने मेंहाँ ! मगर वो रहते हैं 'आशिक़ों के सीने में

बा'द मेरे मरने के सारे लोग यूँ बोलेआदमी वो अच्छा था, जो मर गया मदीने में

कौन है ये दीवाना ? किस का है ये दीवाना ?हश्र में भी कहता है जाना है मदीने में

कौन है ये दीवाना ? किस का है ये दीवाना ?महशर में भी कहता है कि जाना है मदीने में

कौन सी जगह उन के 'आशिक़ों से ख़ाली हैहर जगह है परवाने, शम'अ है मदीने में

कितना प्यारा सीना है, बस गया मदीना हैप्यारे तयबा वाले हैं जो रहते हैं मदीने में

काश ! उन के कूचे से लाए ये सबा पैग़ामचल तुझे बुलाते हैं मुस्तफ़ा मदीने में

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