नात लिरिक्स

Ya Rab Bitha De Gumbad-e-Khazra Ki Chhaon Mein

या रब बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं में

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रब ! बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं मेंमसनद ये माँगता हूँ हमेशा दु'आओं में

या रब ! बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं में

इक हाज़िरी से बढ़ गया है शौक़-ए-हाज़िरीमैं बार बार पहुँचूँ हरम की फ़ज़ाओं में

या रब ! बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं में

आओ चलें हुज़ूर का दरबार देखनेख़ुश्बू बसी हुई है जहाँ की हवाओं में

या रब ! बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं में

शाहों को आरज़ू है जहाँ पर गदाई कीमुझ को शुमार कर ले वहाँ के गदाओं में

या रब ! बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं में

तयबा मुझे दिखा दे, मेरा दिल उदास हैहै कैफ़-ओ-इंबिसात उसी दर की छाओं में

या रब ! बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं में

मंज़िल मेरी मदीना है, रोको न राह मेंपड़ने दो आबले से उजागर के पाओं में

या रब ! बिठा दे गुंबद-ए-ख़ज़रा की छाओं में

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