नात लिरिक्स

Ya Nabi Ya Shah-e-Abrar Tawajjoh Keeje

या नबी या शह-ए-अबरार तवज्जोह कीजे

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

करम हो, या रसूलल्लाह ! करम हो, या रसूलल्लाह !करम हो, या रसूलल्लाह ! करम हो, या हबीबल्लाह !

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजेइस तरफ़ भी, मेरे सरकार ! तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

दुश्मन-ए-जान हुआ जाता है सारा 'आलमकीजिए, अहमद-ए-मुख़्तार ! तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

मा-सिवा आप के मैं किस से तवक़्क़ो' रक्खूँआप ही हैं मेरे ग़म-ख़्वार, तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

आप से कब है छुपा हाल दिल-ए-बेकल का

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ आप के होते हुएक्यूँ किसी के दर पे जाएँ आप के होते हुए

आप से कब है छुपा हाल दिल-ए-बेकल काआप हैं वाक़िफ़-ए-असरार, तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

सुन के आया हूँ मैं जाऊका मुज़्दा, आक़ा !हूँ बहुत ही मैं गुनहगार, तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

आप से ही मेरी फ़रियाद है, जान-ए-'आलम !मुश्किलों में हूँ गिरिफ़्तार, तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

दोनों 'आलम ही सँवर जाएँगे फिर तो मेरेमेरे सरकार ! बस इक बार तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

अपने आसिफ़ को भी, सरकार ! नवाज़ें दर सेआप हैं मालिक-ओ-मुख़्तार, तवज्जोह कीजे

या नबी ! या शह-ए-अबरार ! तवज्जोह कीजे

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