नात लिरिक्स

Ya Mustafa Ata Ho Phir Izn Hazri Ka

या मुस्तफ़ा अता हो फिर इज़्न हाज़री का

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या मुस्तफ़ा ! 'अता हो फिर इज़्न हाज़िरी काकर लूँ नज़ारा आ कर मैं आप की गली का

इक बार तो दिखा दो रमज़ान में मदीनाबेशक बना लो, आक़ा ! मेहमान दो घड़ी का

रोता हुवा मैं आऊँ, दाग़-ए-जिगर दिखाऊँअफ़्साना भी सुनाऊँ मैं अपनी बेकसी का

मैं सब्ज़ सब्ज़ गुंबद की देख लूँ बहारेंअब इज़्न दे दो, आक़ा ! तुम मुझ को हाज़िरी का

मौला ! ग़म-ए-मदीना, दे दे ग़म-ए-मदीनादीवाना तू बना दे मुझ को तेरे नबी का

ख़ून-ए-जिगर से सींचा है बाग़ सुन्नियत काकर दो करम, वसीला उस मदनी मुर्शिदी का

या सय्यिद-ए-मदीना ! बस आप ही निभानागो हूँ बड़ा कमीना, पर हूँ तो आप ही का

या मुस्तफ़ा ! गुनाहों की 'आदतें निकालोजज़्बा मुझे 'अता हो सुन्नत की पैरवी का

हूँ दूर अब बुलाएँ, देता हूँ वासिता मैंमज़्लूम-ए-कर्बला की, सरकार ! बेकसी का

अल्लाह ! हुब्ब-ए-दुनिया से तू मुझे बचानासाइल हूँ, या ख़ुदा ! मैं 'इश्क़-ए-मुहम्मदी का

फ़ख़्र-ओ-ग़ुरूर से तू, मौला ! मुझे बचानाया रब ! मुझे बना दे पैकर तू 'आजिज़ी का

ईमाँ पे, रब्ब-ए-रहमत ! दे दे तू इस्तिक़ामतदेता हूँ वासिता मैं तुझ को तेरे नबी का

हो हर नफ़स मदीना, धड़कन में हो मदीनाजब तक न साँस टूटे, सरकार ! ज़िंदगी का

दुनिया के ताजदारो ! तुम से मुझे ग़रज़ क्या !मँगता हूँ, मैं तो मँगता सरकार की गली का

अल्लाह ! इस से पहले ईमाँ पे मौत दे देनुक़्साँ मेरे सबब से हो सुन्नत-ए-नबी का

उल्फ़त की भीक दे दो, देता हूँ वासिता मैंसिद्दीक़ का, 'उमर का, 'उस्मान का, 'अली का

कुछ नेकियाँ कमा ले, जल्द आख़िरत बना लेकोई नहीं भरोसा, ऐ भाई ! ज़िंदगी का

मीज़ाँ पे सब खड़े हैं, आ'माल तुल रहे हैंरख लो भरम ख़ुदा-रा 'अत्तार क़ादरी का

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