नात लिरिक्स

Ya Muhammad Noor-e-Mujassam Ya Habibi Ya Maulai

या मुहम्मद नूर-ए-मुजस्सम या हबीबी या मौलाई

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अदीब रायपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या मुहम्मद नूर-ए-मुजस्सम ! या हबीबी ! या मौलाई !तस्वीर-ए-कमाल-ए-मोहब्बत, तनवीर-ए-जमाल-ए-ख़ुदाई

तेरा वस्फ़ बयाँ हो किस से, तेरी कौन करेगा बड़ाईइस गर्द-ए-सफ़र में गुम है जिब्रील-ए-अमीं की रसाई

तेरी एक नज़र के तालिब, तेरे एक सुख़न पर क़ुर्बांये सब तेरे दीवाने, ये सब तेरे शैदाई

ये रंग-ए-बहार-ए-गुलशन, ये गुल और गुल का जोबनतेरे नूर-ए-क़दम का धोवन, उस धोवन की रा'नाई

मा अज्मलका तेरी सूरत, मा अह़सनका तेरी सीरतमा अक्मलका तेरी 'अज़मत, तेरी ज़ात में गुम है ख़ुदाई

ए मज़हर-ए-शान-ए-जमाली ! ए ख़्वाजा-ओ-बंदा-ए-'आली !मुझे हश्र में काम आ जाए मेरा ज़ौक़-ए-सुख़न-आराई

तू रईस-ए-रोज़-ए-शफ़ा'अत, तू अमीर-ए-लुत्फ़-ओ-'इनायतहै अदीब को तुझ से निस्बत, ये ग़ुलाम है तू आक़ाई

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