नात लिरिक्स

Wilayat Ke Mah-e-Mubeen Ghaus-e-Azam

विलायत के माह-ए-मुबीं ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरीशायर: मुफ़्ती अहमद मशहूद रज़ाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

विलायत के माह-ए-मुबीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !रसूलों के तुम जा-नशीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शब-ओ-रोज़ जल्वे हों तेरे नज़र मेंकटे यूँ ही 'उम्र-ए-हसीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

हो बग़दाद-ओ-तयबा का फ़ैज़ान मुझ पररहे दोनों मुझ से क़रीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तुम्हें देख कर देख लूँ मुस्तफ़ा कोपिला दो वो जाम-ए-हसीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

चलो फिर दयार-ए-हबीब-ए-ख़ुदा कोमिले सदक़ा-ए-ग्यारहवीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

बरसता रहे मुझ पे बारान-ए-रहमतरहे मेरे दिल में मकीं ग़ौस-ए-आ'ज़म

नबी के दुलारे हुसैन-ओ-हसन हैंहो तुम उन के नूर-ए-मुबीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

झुका है ये सर तेरी 'अज़मत के आगेहै ज़ेर-ए-क़दम ये जबीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

मुज़य्यन है जल्वों से अब तक तुम्हारेबहार-ए-गुलिस्तान-ए-दीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

न रूठूँ ज़माने के ज़ोर-ओ-सितम सेमुझे दीजिए वो यक़ीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

बचा लो मुझे उन के शर्र-ओ-फ़ितन सेकि हैं घात में हासिदीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

है पेश-ए-नज़र आ'ला हज़रत का रौज़ामिले हो हमें तुम यहीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

रज़ा साथ हो और शेर-ए-रज़ा भीहो जिस दम दम-ए-वापसीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

न डूबा, न डूबे हमारा सफ़ीनाकि हैं ना-ख़ुदा बिल-यक़ीं ग़ौस-ए-आ'ज़म

छुपा लेंगे ख़ुश-तर को दामन में अपनेतुफ़ैल-ए-रज़ा है यक़ीं, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

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