नात लिरिक्स

Jalwa-e-Noor-e-Khuda Ghaus-ul-wara

जल्वा-ए-नूर-ए-ख़ुदा ग़ौस-उल-वरा

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरीशायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माइल वास्ती क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जल्वा-ए-नूर-ए-ख़ुदा, ग़ौस-उल-वरा !जा-नशीन-ए-मुस्तफ़ा, ग़ौस-उल-वरा !

निस्बतन हसनी-हुसैनी आप हैंआप इब्न-ए-मुर्तज़ा, ग़ौस-उल-वरा !

ऊँचे ऊँचे औलिया की गर्दनेंआप के हैं ज़ेर-ए-पा, ग़ौस-उल-वरा !

गर्दनों पर ही नहीं तेरे क़दमदिल पे भी है नक़्श-ए-पा, ग़ौस-उल-वरा

आप के बाबा 'अली मुश्किल-कुशाआप भी मुश्किल-कुशा, ग़ौस-उल-वरा !

अल-मदद या ग़ौस जैसे ही कहाकाम बिगड़ा बन गया, ग़ौस-उल-वरा !

अंबिया में जिस तरह हैं मुस्तफ़ाऔलिया में है मेरा ग़ौस-उल-वरा

क़ुम-बि-इज़्निल्लाह जैसे ही कहाउठ के मुर्दे ने कहा ग़ौस-उल-वरा

आ नहीं सकती बला हरगिज़ कभीघर में है तुग़रा तेरा, ग़ौस-उल-वरा !

शेर को भी रख दे पल में चीर करजिस पे हो साया तेरा, ग़ौस-उल-वरा !

नाज़ है, गुलज़ार ! हम को नाज़ हैक़ादरी हैं, पीर-ए-मा ग़ौस-उल-वरा

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