नात लिरिक्स

Dukh Dard Mustafa Ne Sare Mita Diye Hain | Un Ki Mahak Ne Dil Ke Gunche Khila Diye Hain With Tazmeen

दुख दर्द मुस्तफ़ा ने सारे मिटा दिए हैं | उन की महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिये हैं तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दुख-दर्द मुस्तफ़ा ने सारे मिटा दिए हैंआमद ने बुर्ज-ए-क़ैसर-किसरा गिरा दिए हैंवीरान बस्तियों को गुलशन बना दिए हैंउन की महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिए हैंजिस राह चल गए हैं कूचे बसा दिए हैं

रूह-उल-अमीं ने देखी रिफ़'अत पे उन की आँखेंअसरा की शब लगी थी उम्मत पे उन की आँखेंहै, मोमिनो ! तुम्हारी ग़ुर्बत पे उन की आँखेंजब आ गई हैं जोश-ए-रहमत पे उन की आँखेंजलते बुझा दिए हैं, रोते हँसा दिए हैं

अहमद रज़ा चले जब जन्नत कराने वाजिबआँखें थी सू-ए-का'बा, तयबा पे दिल था राग़िबतूफ़ाँ जो गिर के आया, बोले नबी के नाइबआने दो या डुबो दो अब तो तुम्हारी जानिबकश्ती तुम्हीं पे छोड़ी लंगर उठा दिए हैं

महशर के दिन परेशाँ हर एक फ़र्द होगादोज़ख़ के डर से चेहरों का रंग ज़र्द होगाशाह-ए-उमम के दिल में उम्मत का दर्द होगाअल्लाह क्या जहन्नम अब भी न सर्द होगारो रो के मुस्तफ़ा ने दरिया बहा दिए हैं

अहमद रज़ा की लिक्खी ना'त-ए-रसूल-ए-अकरमजब दाग़ ने पड़ी है मबहूत थे मुजस्समअपना कलम उठाया, लिक्खा शरर ये उस दममुल्क-ए-सुख़न की शाही तुम को, रज़ा ! मुसल्लमजिस सम्त आ गए हो सिक्के बिठा दिए हैं

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