नात लिरिक्स

Walwala-e-Ishq-o-Ulfat Aaya Qurbani Ka Din

वलवला-ए-इश्क़-ओ-उल्फ़त आया क़ुर्बानी का दिन

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क़ुर्बानी है रब के लिएऔर शुक्राना सब के लिए

वलवला-ए-'इश्क़-ओ-उल्फ़त, आया क़ुर्बानी का दिनये है इब्राहीमी सुन्नत, आया क़ुर्बानी का दिन

क़ुर्बानी है रब के लिएऔर शुक्राना सब के लिए

आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिनआया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन

जानवर और माल का सदक़ा हैं ये क़ुर्बानियाँहोगी घर-भर की हिफ़ाज़त, आया क़ुर्बानी का दिन

क़ुर्बानी है रब के लिएऔर शुक्राना सब के लिए

आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिनआया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन

है हदीस-ए-मुस्तफ़ा और हिस्सा-ए-क़ुरआन हैये है क़ुर्बानी 'इबादत, आया क़ुर्बानी का दिन

क़ुर्बानी है रब के लिएऔर शुक्राना सब के लिए

आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिनआया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन

ऐ उजागर ! ख़ुश-दिली से जानवर क़ुर्बान करमिलती है अल्लाह की क़ुर्बत, आया क़ुर्बानी का दिन

क़ुर्बानी है रब के लिएऔर शुक्राना सब के लिए

आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिनआया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन

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