नात लिरिक्स

Wajh-e-Nishat-e-Zindagi Rahat-e-Jaan Tum Hi To Ho

वज्ह-ए-निशात-ए-ज़िंदगी राहत-ए-जाँ तुम ही तो हो

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सूरतशायर: अख़्तर रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वज्ह-ए-निशात-ए-ज़िंदगी राहत-ए-जाँ तुम ही तो होरूह-ए-रवान-ए-ज़िंदगी जान-ए-जहाँ तुम ही तो हो

तुम जो न थे तो कुछ न था, तुम जो न हो तो कुछ न होजान-ए-जहाँ तुम ही तो हो, जान-ए-जिनाँ तुम ही तो हो

ताज-ए-वक़ार-ए-ख़ाकियाँ, नाज़िश-ए-'अर्श-ओ-'अर्शियाँफ़ख़्र-ए-ज़मीन-ओ-आसमाँ, फ़ख़्र-ए-ज़माँ तुम ही तो हो

किस से करूँ बयान-ए-ग़म ? कौन सुने फ़ुग़ान-ए-ग़म ?पाऊँ कहाँ अमान-ए-ग़म ? अम्न-ओ-अमाँ तुम ही तो हो

रूह-ए-रवान-ए-ज़िंदगी, ताब-ओ-तवान-ए-ज़िंदगीअम्न-ओ-अमान-ए-ज़िंदगी, शाह-ए-शहाँ तुम ही तो हो

तुम हो चराग़-ए-ज़िंदगी, तुम हो जहाँ की रौशनीमेहर-ओ-मह-ओ-नुजूम में जल्वा-कुनाँ तुम ही तो हो

तुम से जहान-ए-रंग-ओ-बू, तुम हो चमन की आबरूजान-ए-बहार-ए-गुलसिताँ, सर्व-ए-चमाँ तुम ही तो हो

तुम हो क़वाम-ए-ज़िंदगी, तुम से है ज़िंदगी बनीतुम से कहे है ज़िंदगी, रूह-ए-रवाँ तुम ही तो हो

अस्ल-ए-शजर में हो तुम ही, नख़्ल-ओ-समर में हो तुम हीउन में 'अयाँ तुम ही तो हो, उन में नुमाँ तुम ही तो हो

तुम हो नमूद-ए-अव्वलीं, शम'-ए-अबद भी हो तुम हीशाह-ए-ज़मन यहाँ-वहाँ सिक्का-निशाँ तुम ही तो हो

अख़्तर की है मजाल क्या ! महशर में सब हैं दम-ब-ख़ुदसब की नज़र तुम ही पे है, सब की ज़बाँ तुम ही तो हो

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