नात लिरिक्स

Mustafa Ke Pale Hain Hum Bareilly Wale Hain

मुस्तफ़ा के पाले हैं हम बरेली वाले हैं

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सूरतशायर: मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुस्तफ़ा के पाले हैं, हम बरेली वाले हैंदिल से भोले-भाले हैं, हम बरेली वाले हैं

दम रज़ा का भरते हैं, हम बरेली वाले हैंख़्वाजा ख़्वाजा करते हैं, हम बरेली वाले हैं

ना'त-ए-मुस्तफ़ा पढ़ के, ज़िक्र-ए-औलिया कर केछठी हम मनाते हैं, हम बरेली वाले हैं

मस्लक-ए-मु'ईनुद्दीं ही रज़ा का मस्लक हैसब को ये बताते हैं, हम बरेली वाले हैं

सुन्नियत के जितने भी दहर में सलासिल हैंउन सभी के ना'रे हैं, हम बरेली वाले हैं

मस्लक-ए-रज़ा से हर बातिल क़ौम चिड़ती हैहक़ पर हैं जो कहते हैं, हम बरेली वाले हैं

डगमगा नहीं सकते मिस्ल-ए-सुल्ह-ए-कुल्ली हममुस्तहकम 'अक़ीदे हैं, हम बरेली वाले हैं

सिद्दीक़-ओ-'उमर, 'उस्माँ, मुर्तज़ा भी हैं अपनेहर-सू बोल-बाले हैं, हम बरेली वाले हैं

ख़ादिम-ए-सहाबा हैं, हम गदा-ए-अहल-ए-बैतए'तिदाल वाले हैं, हम बरेली वाले हैं

ग़ौस के हैं शैदाई, अशरफ़ के हैं मतवालेख़्वाजा के दिवाने हैं, हम बरेली वाले हैं

दा'वा-ए-हुब्ब-ए-ख़्वाजा, राफ़िज़ी का झूटा हैख़्वाजा बस हमारे हैं, हम बरेली वाले हैं

हामिद-ओ-रज़ा, नूरी से जुड़ा है दिल का तारइन से दिल के रिश्ते हैं, हम बरेली वाले हैं

मक्र-ए-ताहिर पर अख़्तर ने ये उस से फ़रमायारस्ते देखे भाले हैं, हम बरेली वाले हैं

सुन्नियों के रहबर हैं अल्लामा-ओ-'अस्जद अबये दोनों भी कहते हैं, हम बरेली वाले हैं

दुनिया के किसी ख़ित्ते से त'अल्लुक़ हो लेकिनसब यहीं पुकारे हैं, हम बरेली वाले हैं

सीम-ओ-ज़र की लालच में बेचते हैं वो ईमाँसौदे में ख़सारे हैं, हम बरेली वाले हैं

ज़ुल्मत के तलातुम का हम को कुछ नहीं खटकानूर हैं, उजाले हैं, हम बरेली वाले हैं

दहशत-ए-रज़ा हम ने देखी वो मुजावर मेंशुक्र-ए-हक़ बजाते हैं, हम बरेली वाले हैं

बातिलों से कह दीजे छेड़े न हमें, अय्यूब !आ'ला हज़रत वाले हैं, हम बरेली वाले हैं

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