नात लिरिक्स

Har Shaan Teri Shaan Pe Qurban Hai Maula

हर शान तेरी शान पे क़ुर्बान है मौला

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हर शान तेरी शान पे क़ुर्बान है, मौला !क्या ख़ूब बुज़ुर्गी की तेरी शान है, मौला !

ताबिंदा है क़िंदील-ए-फ़लक से ये ज़मानाऔर उस में तेरे नूर का फ़ैज़ान है, मौला !

हर सम्त तेरे हुस्न के जल्वे की धमक हैक्या दश्त-ओ-चमन, कोह-ओ-बयाबान है, मौला !

ख़ैरात मिले मुझ को तेरी शान के लाइक़मैं साइल-ए-ख़स्ता हूँ, तू सुल्तान है, मौला !

हम चाह के भी फ़ज़्ल तेरा गिन नहीं सकतेबे-लौस तेरा ख़ल्क़ पे एहसान है, मौला !

वल्लाह मेरी चाह नहीं शोहरत-ए-तलबीबस तेरी रज़ा ज़ीस्त का 'उनवान है, मौला !

अब बाद-ए-मदीना से गुल-ए-दिल को खिला देमुरझाया मेरे क़ल्ब का गुलदान है, मौला !

बस अपने करम से तू मुझे बख़्श दे, या रब !मैं बंदा-ए-'आसी हूँ, तू रहमान है, मौला !

सरकार के जल्वों से अब अय्यूब के दिल कोआबाद तू फ़रमा कि ये वीरान है, मौला !

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