नात लिरिक्स

Ek Noor Ka Jharna Hai Turbat Mere Khwaja Ki

एक नूर का झरना है तुर्बत मेरे ख़्वाजा की

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

एक नूर का झरना है तुर्बत मेरे ख़्वाजा कीतस्वीर-ए-जिनाँ है या चौखट मेरे ख़्वाजा की

वो पल में भिकारी को सुल्तान बनाते हैंकुछ ऐसी है शाहाना 'आदत मेरे ख़्वाजा की

एक कूज़े में भर डाला ख़्वाजा ने अना सागरले देख ले, ऐ मुन्किर ! क़ुदरत मेरे ख़्वाजा की

देते हैं ग़रीबों को वो ख़ास नवाज़िश सेखाते हैं शहंशाह भी ने'मत मेरे ख़्वाजा की

दौलत का करूँ मैं क्या ? शोहरत का करूँ मैं क्या ?अल्लाह रखे दाइम निस्बत मेरे ख़्वाजा की

ख़्वाजाओं के ख़्वाजा हैं, राजाओं के राजा हैंहै अहल-ए-विलायत में शोहरत मेरे ख़्वाजा की

अक़्ताब भी हैराँ हैं, अब्दाल भी हैराँ हैंहै ऐसी बुलंदी पर 'अज़मत मेरे ख़्वाजा की

संजर से किरन फूटी फिर हिन्द में आ पहुँचीऔर हिन्द में फिर महकी निकहत मेरे ख़्वाजा की

वीज़ा दर-ए-आक़ा का ख़्वाजा जी मुझे देंगेना कहना नहीं, साबिर ! 'आदत मेरे ख़्वाजा की

बद-कार हूँ या अच्छा, साबिर ! हूँ मगर उन काबख़्शाएगी महशर में निस्बत मेरे ख़्वाजा की

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