नात लिरिक्स

Karbala Se Meri Lau Lagi Hai

कर्बला से मेरी लौ लगी है

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुझ को, शब्बीर ! अपना बना लोकर्बला से मेरी लौ लगी हैअब तो नज़र-ए-करम मुझ पे डालोकर्बला से मेरी लौ लगी है

ख़ूब-तर ज़ख़्म खाया हुआ हूँदहर का मैं सताया हुआ हूँडाल दो मुझ पे नज़र-ए-'इनायतदिल का दीपक जलाया हुआ हूँबहर-ए-ग़म से मुझे अब निकालोकर्बला से मेरी लौ लगी है

आ गया फिर से माह-ए-मुहर्रमया'नी ज़िक्र-ए-शहादत का मौसमऐ क़सीम-ए-विलायत ! तवज्जोहकह रही है यही चश्म-ए-पुरनममेरी झोली में ख़ैरात डालोकर्बला से मेरी लौ लगी है

दिल की दुनिया में फिर खलबली हैक्या कहूँ कैसी भगदड़ मची हैग़र्क़ होने को है अब सफ़ीनाफिर से बाद-ए-मुख़ालिफ़ चली हैडूबने से मुझे तुम बचा लोकर्बला से मेरी लौ लगी है

हर-सू नहर-ए-फ़ितन फूटते हैंकंज़-ए-ईमान को लूटते हैंकिस-क़दर पुर-ख़तर दौर आयाहर तरफ़ भेड़िये घूमते हैंअपने दामन में मुझ को छुपा लोकर्बला से मेरी लौ लगी है

कर दो मेरा जिगर नूरी नूरीदे दो मुझ को भी इज़्न-ए-हुज़ूरीवासिता सय्यिदा फ़ातिमा कामेरे दिल की ये हसरत हो पूरीअपने दर का मुझे सग बना लोकर्बला से मेरी लौ लगी है

जुर्म कोई मेरा धो रहा हैदुनिया-ए-दिल में कुछ हो रहा हैताजदार-ए-शहीदाँ करम होदाग़-ए-फ़ुर्क़त से दिल रो रहा हैअपने दर पर मुझे अब बुला लोकर्बला से मेरी लौ लगी है

कहते हैं सब गुलिस्तान हूँ मैंजबकि सहरा-ए-वीरान हूँ मैंअपनी बीती मैं अब क्या सुनाऊँनफ़्स-ए-शर से परेशान हूँ मैंअब ख़ुदारा इस आफ़त को टालोकर्बला से मेरी लौ लगी है

शहर-ए-उल्फ़त है आबाद तुम सेसुन्नियत का है दिल शाद तुम सेसुन लो, ऐ मेरे दिल के शहंशाह !है यही अब की फ़रियाद तुम सेअपने अय्यूब को अब सँभालोकर्बला से मेरी लौ लगी है

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