नात लिरिक्स

Hamare Qaid-o-Rahbar Hussain Zinda Hain

हमारे क़ाइद-ओ-रहबर हुसैन ज़िंदा हैं

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हमारे क़ाइद-ओ-रहबर हुसैन ज़िंदा हैंरसूल-ए-पाक के मज़हर हुसैन ज़िंदा हैं

नबी के दीन की ख़ातिर शहीद हो कर भीहर एक सुन्नी के अंदर हुसैन ज़िंदा हैं

डरे वो जिन का जहाँ में नहीं कोई हामीहुसैनियों को हो क्यूँ डर, हुसैन ज़िंदा हैं

तुम्हारा तख़्त-ए-हुकूमत अभी पलट देंगेयज़ीदियो ! न करो शर, हुसैन ज़िंदा हैं

जिनाँ में क़ासिम-ओ-'अब्बास सैर करते हैंवहीं पे अकबर-ओ-असग़र, हुसैन ज़िंदा हैं

शहीदों को कभी मुर्दा गुमान न करनाख़ुदा भी कहता है यकसर हुसैन ज़िंदा हैं

उन्हें जो मुर्दा समझते हैं वो करे मातममेरा 'अक़ीदा है दिलबर हुसैन ज़िंदा हैं

लगाया ग़ौस-ओ-रज़ा, ख़्वाजा ने यही ना'राहमारे मौला-ओ-सरवर हुसैन ज़िंदा हैं

अभी तो बाक़ी है कर्बल का आख़िरी मैदाँबता दो कुफ़्र को जा कर हुसैन ज़िंदा हैं

यज़ीद-ए-वक़्त का दिल काँप जाए दहशत सेऐ सुन्नियो ! कहो मिल कर, हुसैन ज़िंदा हैं

ज़मीन-ए-कर्ब-ओ-बला कह रही है क्या तुझ सेसुन, ऐ यज़ीद के लश्कर ! हुसैन ज़िंदा हैं

इसी से जान लो है कौन फ़ातेह-ए-कर्बलयज़ीद मर गया है पर हुसैन ज़िंदा हैं

मता'-ए-'इश्क़ की ख़ैरात माँग लो, अय्यूब !सरापा 'इश्क़ के पैकर हुसैन ज़िंदा हैं

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।