नात लिरिक्स

Jo Hai Khuda Ka Ek Wali | Wo Mera Peer Azhari

जो है ख़ुदा का इक वली | वो मेरा पीर अज़हरी

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: नईम रज़ा तहसीनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो है ख़ुदा का इक वली, है सच्चा 'आशिक़-ए-नबी'अता है ग़ौस-ए-पाक की, वो मेरा पीर अज़हरी

वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरीवो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

दु'आ-ए-मुस्तफ़ा रज़ा, रज़ा-ए-मुस्तफ़ा रज़ासदा-ए-मुस्तफ़ा रज़ा, 'अता-ए-मुस्तफ़ा रज़ाहै उस पे हर जगह सदा निगाह-ए-मुस्तफ़ा रज़ाहै ऐसी शान का धनी, वो मेरा पीर अज़हरी

वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरीवो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

बुज़ुर्गों की दु'आएँ ले के हिन्द से वो जब चलापहुँच के मिस्र देखते ही देखते वो छा गयाये उस का 'इल्मी मर्तबा, था दंग सारा जामि'आबना जो फ़ख़्र-ए-अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरीवो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

मचा के 'इल्म-ओ-फ़न की धूम मिस्र से वो आ गएये उन की शान थी कि लेने मुस्तफ़ा रज़ा गएथा इतना आप पर यक़ीं, बनाया अपना जा-नशींउन्हीं को कहते हैं सभी, वो मेरा पीर अज़हरी

वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरीवो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

ग़ुरूर-ए-दुश्मन-ए-नबी को तोड़ता चला गयासभी को मस्लक-ए-रज़ा से जोड़ता चला गयाहर एक सुल्ह-ए-कुल्ली का जो पर्दा फ़ाश कर गयाथा कौन बोल दो सभी, वो मेरा पीर अज़हरी

वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरीवो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

बुलंद रब ने कर दिया था ऐसा उन का मर्तबाउस एक ज़ात से था दुश्मनों पे इतना दबदबाकि बस्ती-बस्ती क़रिया का जहाँ भी ना'रा लग गया'अवाम सब पुकार उठी, वो मेरा पीर अज़हरी

वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरीवो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

हर इक मुरीद को, न'ईम ! ग़ौस से मिला दियाजहाँ जहाँ क़दम गए, 'इलाक़ा जगमगा दियावो सुन्नियों की शान है, वो रज़वियों की जान हैदिलों का है सुकून भी, वो मेरा पीर अज़हरी

वो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरीवो मेरा पीर अज़हरी, वो मेरा पीर अज़हरी

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