नात लिरिक्स

Al Madad Maula Hussain Fatima Zahra Ke Chain

अल-मदद मौला हुसैन फ़ातिमा ज़हरा के चैन

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: मौलाना अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

ज़हरा की निगाहों का है नूर-ए-नज़र शब्बीरमौला-ए-विलायत का है लख़्त-ए-जिगर शब्बीरसुल्तान-ए-मदीना का बे-मिस्ल गुहर शब्बीरअल्लाह के शेरों का है शेर-ए-बबर शब्बीर

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

फ़ैज़ान-ए-नबी से है सैराब मेरा शब्बीरहै चर्ख़-ए-शहादत का महताब मेरा शब्बीरमिलता ही नहीं हम-सर दुनिया में कहीं जिस काज़हरा का है वो दुर्र-ए-नायाब मेरा शब्बीर

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

महताब-ओ-गगन बहर-ए-ज़ख़्ख़ार हुसैनी हैमौला के करम से ये संसार हुसैनी हैये दिल भी हुसैनी है, ये जाँ भी हुसैनी हैइस्लाम की फ़ितरत का हर तार हुसैनी है

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

कर्बल की ज़मीं पर इक नायाब सा मंज़र हैइक सम्त हज़ारों हैं, इक सम्त बहत्तर हैफिर ग़ौल-ए-यज़ीदी में क्यूँ ख़ौफ़ है भगदड़ हैमैदान में निकला जब वो सिब्त-ए-पयम्बर है

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

'अब्बास से सीखा है दुनिया ने वफ़ा करनाअकबर ने सिखाया है मिल्लत का दिफ़ा' करनाअसग़र ने सिखाया है जाँ अपनी फ़िदा करनाज़ैनब ने दिया दर्स-ए-अंदाज़-ए-रिदा करना

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

वो शम'-ए-शहादत है, दिल उस का दीवाना हैहर एक ज़बाँ पर अब उस का ही तराना हैउस ज़ात की रिफ़'अत हो किस मुँह से बयाँ आख़िरज़हरा का दुलारा तो यकता-ए-ज़माना है

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

यूँ गर्दिश-ए-दौराँ से अहबाब न घबराओइस तर्ज़-ए-मोहब्बत को हर सम्त ही फैलाओमिलना है अगर तुम को सुल्तान-ए-शहीदाँ सेमीराँ से इजाज़त लो, कर्बल को चले जाओ

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

गुफ़्तार हुसैनी रख, किरदार हुसैनी रखज़ालिम के मुक़ाबिल तू ललकार हुसैनी रखपाना है अगर नुसरत घर-बार हुसैनी रखहर मोड़ पे तू अपना मे'यार हुसैनी रख

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

यूँही नहीं वो हर इक के दिल में समाया हैतारीख़ रक़म कर के हाँ उस ने दिखाया हैफ़ितना-ए-यज़ीदी को दुनिया से मिटाया हैशब्बीर ने कर्बल में इस्लाम बचाया है

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

ऐ शाह ! मुझे अपनी उल्फ़त में गुमा दीजेअब मुझ को तरीक़त का इक जाम पिला दीजेलिल्लाह मुझे अपनी मिदहत का सिला दीजेअब मेरे मुक़द्दर की बिगड़ी को बना दीजे

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

ऐ काश ! मैं बन जाऊँ दरबान-ए-दर-ए-ज़हरासौ जान से ये दिल है क़ुर्बान-ए-दर-ए-ज़हरालहराए न क्यूँ बुर्ज-ए-रिफ़'अत पे 'अलम इस काअय्यूब पे जारी है फ़ैज़ान-ए-दर-ए-ज़हरा

अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !अल-मदद मौला हुसैन ! फ़ातिमा ज़हरा के चैन !

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