नात लिरिक्स

Noor Ka Saman Chhaya Urs-e-Azhari Aaya

नूर का समाँ छाया उर्स-ए-अज़हरी आया

नात ख़्वान: साबिर रज़ा अज़हरी सुरतशायर: मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नूर का समाँ छाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आयाफ़ैज़-ए-मुस्तफ़ा लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

ज़िक्र-ओ-फ़िक्र-ए-दुनिया से हट के हुस्न-ए-अख़्तर नेदिल में जल्वा फ़रमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

मुद्दतों से थे बेचैन, रज़वियों के दोनों नैनइंतिज़ार रंग लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

हासिदों के सीने पे देखिए गिरी बिजलीक़ल्ब-ए-सुन्नी मुस्काया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

फ़ज़्ल-ए-मुस्तफ़ा से वो का'बे के बने मेहमाँवाह क्या शरफ़ पाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

देख कर, ऐ दीवानो ! हुस्न-ए-रू-ए-अख़्तर कोचाँद भी है शरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

वाह वाह ! ज़रा देखो हल्क़ा ज़िक्र-ए-अख़्तर काकिस-क़दर है गरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

दस्त-ए-शाह-ए-अस्जद से जाम-ए-अज़हरी पीजेकासा फिर से छलकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

ग़ौल-ए-सुल्ह-ए-कुल्ली में ज़लज़ला किया बरपानज्द जिन से लरज़ाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

साल भर से पर्दे में था समाँ ये नूरानीरुख़ से पर्दा सरकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

सुन्नियो ! चले आओ साया-ए-बरेली मेंअब्र-ए-नूर बरसाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

'उर्स-ए-फ़ख़्र-ए-अज़हर की बरकतें हैं ये, अय्यूब !मेरा क़ल्ब चमकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया

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