नात लिरिक्स

Teri Zaat Hai Abqari Ghaus-e-Azam

तेरी ज़ात है अब्क़री ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: अब्दुल मुस्तफ़ा रज़वी अदोनीशायर: मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी ज़ात है 'अब्क़री, ग़ौस-ए-आ'ज़म !मिली है तुझे सरवरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरा बंदा दोज़ख़ की आतिश से, मौला !बरी है बरी है बरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

ख़ुदा का करम है मैं बंदा हूँ तेराहुआ जब से मैं क़ादरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरा, तेरे बाबा का ज़िक्र-ए-मु'अत्तरयही है मेरी शा'इरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

कभी ख़्वाब में आ के जल्वा दिखाओनज़र मुंतज़िर है मेरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरे दर पे जाऊँ तो वापस न आऊँमुयस्सर हो वो हाज़िरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

करूँ हर घड़ी तेरे नाना की ख़िदमतमुझे दे दे वो नौकरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

सँवर जाए मेरे मुक़द्दर की बिगड़ीनज़र डालो इक सरसरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तू है 'अब्द-ए-क़ादिर, तेरा रब है क़ादिरज़हे-बख़्त मैं क़ादरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरे दुश्मनों पर ख़ुदा के ग़ज़ब कीक़हर बन के बिजली गिरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तू वो बंदा-परवर है फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा सेफ़िदा तुझ पे है परवरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

ज़माने के हालात तुझ पर 'अयाँ हैंसभी बातिनी ज़ाहिरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

हर इक शातिम-ए-मुस्तफ़ा को सज़ा दोयही 'अर्ज़ है आख़िरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शहा ! अपने अय्यूब पर इक नज़र होयही 'अर्ज़ है आख़िरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

फिराओ न अय्यूब को अब ख़ुदा-राइसे दे दो अब नौकरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

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