नात लिरिक्स

Mehr-e-Baiza Hai Jafar-e-Sadiq | Durr-e-Yakta Hai Jafar-e-Sadiq

मेहर-ए-बैज़ा है जाफ़र-ए-सादिक़ | दुर्र-ए-यकता है जाफ़र-ए-सादिक़

नात ख़्वान: अब्दुल मुस्तफ़ा रज़वी अदोनीशायर: मौलाना अय्यूब रज़ा अमजदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेहर-ए-बैज़ा है जा'फ़र-ए-सादिक़दुर्र-ए-यकता है जा'फ़र-ए-सादिक़

अच्छा अच्छा है जा'फ़र-ए-सादिक़प्यारा प्यारा है जा'फ़र-ए-सादिक़

शाह-ए-कौनैन की सख़ावत काबहता दरिया है जा'फ़र-ए-सादिक़

बद्र-ए-कामिल को देखता हूँ यातेरा चेहरा है, जा'फ़र-ए-सादिक़ !

जिस से बीमार दिल शिफ़ा पाएवो मसीहा है जा'फ़र-ए-सादिक़

ताजदार-ए-रुसुल, इमाम-ए-कुलतेरा नाना है जा'फ़र-ए-सादिक़

मुर्तज़ा शेर-ए-हक़ का लख़्त-ए-जिगरइब्न-ए-ज़हरा है जा'फ़र-ए-सादिक़

मेरे आक़ा मु'आविया के लिएख़ूब सुथरा है जा'फ़र-ए-सादिक़

मेरे बाक़िर का तुझ पे और तेरामुझ पे साया है, जा'फ़र-ए-सादिक़ !

बू-हनीफ़ा हैं जिस के ख़ोशा-चींजान लो क्या है जा'फ़र-ए-सादिक़

ग़ौस-ए-आ'ज़म का इफ़्तिख़ार है वोमीर-ए-ख़्वाजा है जा'फ़र-ए-सादिक़

हम रज़ा के हैं और रज़ा उस कायूँ हमारा है जा'फ़र-ए-सादिक़

क़ल्ब-ए-अय्यूब ! क्यूँ परेशाँ हैतेरा आक़ा है जा'फ़र-ए-सादिक़

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।