नात लिरिक्स

Mast-e-Mai-e-Alast Hai Wo Baadshah-e-Waqt Hai

मस्त-ए-मय-ए-अलस्त है वो बादशाह-ए-वक़्त है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अख़्तर रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मस्त-ए-मय-ए-अलस्त है, वो बादशाह-ए-वक़्त हैबंदा-ए-दर जो है तेरा, वो बे-नियाज़-ए-तख़्त है

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

उन की गदाई के तुफ़ैल हम को मिली सिकंदरीरंग ये लाई बंदगी, औज पे अपना बख़्त है

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

गर्दिश-ए-दौर, या नबी ! वीरान दिल को कर गईताब न मुझ में अब रही, दिल मेरा लख़्त-लख़्त है

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

ग़ुंचा-ए-दिल खिलाइए, जल्वा-ए-रुख़ दिखाइएजाम-ए-नज़र पिलाइए, तिश्नगी मुझ को सख़्त है

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

अख़्तर-ए-ख़स्ता ! तयबा को सब चले तुम भी अब चलोजज़्ब से दिल के काम लो, उठो कि वक़्त-ए-रफ़्त है

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

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