नात लिरिक्स

Farishte Jis Ke Zaair Hain Madine Mein Wo Turbat Hai

फ़रिश्ते जिस के ज़ाइर हैं मदीने में वो तुर्बत है

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: अख़्तर रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़रिश्ते जिस के ज़ाइर हैं, मदीने में वो तुर्बत हैये वो तुर्बत है जिस को 'अर्श-ए-आ'ज़म पर फ़ज़ीलत है

भला ! दश्त-ए-मदीना से चमन को कोई निस्बत हैमदीने की फ़ज़ा रश्क-ए-बहार-ए-बाग़-ए-जन्नत है

मदीना गर सलामत है तो फिर सब कुछ सलामत हैख़ुदा रखे मदीने को, इसी का दम ग़नीमत है

मदीना ऐसा गुलशन है जो हर गुलशन की ज़ीनत हैबहार-ए-बाग़-ए-जन्नत भी मदीने की बदौलत है

मदीना छोड़ कर सैर-ए-जिनाँ की क्या ज़रुरत हैये जन्नत से भी बेहतर है, ये जीते जी की जन्नत है

हमें क्या ! हक़ त'आला को मदीने से मोहब्बत हैमदीने से मोहब्बत उन से उल्फत की 'अलामत है

गदागर है जो इस घर का वही सुल्तान-ए-क़िस्मत हैगदाई इस दर-ए-वाला की रश्क-ए-बादशाहत है

जो मुस्तग़नी हुवा उन से, मुक़द्दर उस का ख़ैबत हैख़लीलुल्लाह को हंगाम-ए-महशर उन की हाजत है

इलाही ! वो मदीना कैसी बस्ती है दिखा देनाजहाँ रहमत बरस्ती है, जहाँ रहमत ही रहमत है

मदीना छोड़ कर जन्नत की ख़ुश्बू मिल नहीं सकतीमदीने से मोहब्बत है तो जन्नत की ज़मानत है

ज़मीं पर वो मुहम्मद हैं, वो अहमद आसमानों मेंयहाँ भी उन का चर्चा है, वहाँ भी उन की मिदहत है

यहाँ भी उन की चलती है, वहाँ भी उन की चलती हैमदीना राजधानी है, दो 'आलम पर हुकूमत है

ग़ज़ब ही कर दिया, अख़्तर ! मदीने से चले आएये वो जन्नत है जिस की 'अर्श वालों को भी हसरत है

मदीना छोड़ कर, अख़्तर ! भला क्यूँ जाएँ जन्नत कोये जन्नत क्या, हर इक ने'मत मदीने की बदौलत है

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