नात लिरिक्स

Wafa Ke Paikar Ada Mein Bartar Laqab Mein Haidar Ali Ali Hain | Hamare Rahbar Ali Ali Hain

वफ़ा के पैकर अदा में बरतर लक़ब में हैदर अली अली हैं | हमारे रहबर अली अली हैं

शायर: ज़हीर उस्मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वफ़ा के पैकर, अदा में बर-तर, लक़ब में हैदर 'अली 'अली हैंनबी की लख़्त-ए-जिगर के शौहर, हमारे रहबर 'अली 'अली हैं

तेरा लड़कपन नबी की ख़ातिर, तेरी जवानी निसार उन परलड़े हैं शेरों के जैसे है सब बहादुरी का मदार उन परतक़ाज़ा है मेहरबानियों का, ये जान कर दो निसार उन परख़िज़ाँ के अक़्वाल दूर रख कर, लुटाऊँ सारी बहार उन परअकेला लड़ते वो दुश्मनों से कि जैसे लश्कर 'अली 'अली हैं

वफ़ा के पैकर, अदा में बर-तर, लक़ब में हैदर 'अली 'अली हैंनबी की लख़्त-ए-जिगर के शौहर, हमारे रहबर 'अली 'अली हैं

वो रात हिजरत की सो गए हैं, बे-ख़ौफ़ बिस्तर पे या नबी केचले क़ुबा में अकेले प्यादा, थे पाँव ज़ख़्मी हुए 'अली केख़ुदा ने उन को बनाया चौथा ख़लीफ़ा ख़ुलफ़ा-ए-राशिदीं मेंवो हैं ख़लीफ़ा अबू-बकर के, फ़ारूक़-ए-आ'ज़म के और ग़नी केहसन के वालिद, हुसैन के बाबा, बड़ा मुक़द्दर 'अली 'अली हैं

वफ़ा के पैकर, अदा में बर-तर, लक़ब में हैदर 'अली 'अली हैंनबी की लख़्त-ए-जिगर के शौहर, हमारे रहबर 'अली 'अली हैं

घराना 'आली, मक़ाम आ'ला, है शान ऊँची जुदा 'अली की'अज़ीम बचपन है क्या जवानी, 'अज़ीम है इंतिहा 'अली कीरहूँगा ज़िंदा मैं जब तलक भी, करूँगा मदह सदा 'अली कीक़लम लिखेगा, वरक़ सजेंगे, चलेगी हर दम सना 'अली कीक़लम की ज़ीनत, वरक़ के जौहर, ज़ुबाँ का ज़ेवर 'अली 'अली हैं

वफ़ा के पैकर, अदा में बर-तर, लक़ब में हैदर 'अली 'अली हैंनबी की लख़्त-ए-जिगर के शौहर, हमारे रहबर 'अली 'अली हैं

कोई न पाया क़ज़ा में बढ़ कर 'अली के जैसा सहाबियों मेंजरी बहादुर, 'अज़म में पुख़्ता, रहा नबी के सिपाहियों मेंलिखूँ तो इक दास्ताँ है कातिब, उन्हीं की रौशन शनासियों मेंबड़ा ही रौशन, 'अज़ीम रुत्बा, मिला मुहम्मद के साथियों मेंसख़ा में बर-तर, वफ़ा में आ'ला 'इलम के मसदर 'अली 'अली हैं

वफ़ा के पैकर, अदा में बर-तर, लक़ब में हैदर 'अली 'अली हैंनबी की लख़्त-ए-जिगर के शौहर, हमारे रहबर 'अली 'अली हैं

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।