नात लिरिक्स

Sab Nabiyon Mein Aap Muqarram | Gulab Ki Tazgi Ke Jaisa Mere Nabi Hai Shabab Tera

सब नबियों में आप मुक़र्रम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम | गुलाब की ताज़गी के जैसा मेरे नबी है शबाब तेरा

नात ख़्वान: ज़ोहैब अशरफ़ीशायर: ज़हीर उस्मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम ! सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम !सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम ! सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम !

सब नबियों में आप मुक़र्रम, सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लमआप सरापा हुस्न-ए-मुजस्सम, सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम

आप ने आ कर जीना सिखाया, सोया हुआ जग आ के जगायाआप से ही रौशन है ये 'आलम, सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम

गुलाब की ताज़गी के जैसा, मेरे नबी ! है शबाब तेराजवाब होंगे सभी के लेकिन कोई न होगा जवाब तेरा

गुलाब की ताज़गी के जैसा, मेरे नबी ! है शबाब तेरा

अँधेरी नगरी में बस रहे थे, कोई ख़बर ना थी रौशनी कीलिए हिदायत 'अरब से हम पर तुलू' हुआ आफ़ताब तेरा

गुलाब की ताज़गी के जैसा, मेरे नबी ! है शबाब तेरा

क़ुरआँ की सूरत 'अमल की सीरत 'अयाँ है ज़ात-ए-रसूल में हीहै बंदगी का कोई तो पैकर, जवाब देगी किताब तेरा

गुलाब की ताज़गी के जैसा, मेरे नबी ! है शबाब तेरा

सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम ! सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम !सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम ! सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम !

नूर-ए-नुबुव्वत सब से पहला रब ने तुम्हारा ही तो बनायाआख़िर में आ कर भी हैं मक़दम, सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम

आप अतम अख़्लाक़ में आ'ला, मिलने का अंदाज़ निरालाचेहरे पर जारी है तबस्सुम, सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम

दोनों जहानों की है रहमत, दुनिया 'उक़्बा की है राहतदीद तुम्हारी नज़र की मरहम, सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम

जो डँस ले एड़ी को साँप कोई, दवा की उस को है क्या ज़रुरतशिफ़ा मिलेगी जो हो मुयस्सर किसी को, आक़ा ! लु'आब तेरा

गुलाब की ताज़गी के जैसा, मेरे नबी ! है शबाब तेरा

तरक़्क़ियों की सभी मनाज़िल 'उबूर कर लेगा एक दिन जोपढ़े मुकम्मल 'अमल की ख़ातिर ग़ुलाम कोई निसाब तेरा

गुलाब की ताज़गी के जैसा, मेरे नबी ! है शबाब तेरा

सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम ! सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम !सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम ! सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम !

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