नात लिरिक्स

Aankh Kab Se Tarasti Hai Meri Dil Bhi Hai Beqarar-e-Madina | Kar Raha Hun Main Roz-e-Janam Se Aaj Tak Intizar-e-Madina

आँख कब से तरसती है मेरी दिल भी है बे-क़रार-ए-मदीना | कर रहा हूँ मैं रोज़-ए-जनम से आज तक इंतिज़ार-ए-मदीना

नात ख़्वान: ज़हीर उस्मानीशायर: ज़हीर उस्मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आँख कब से तरसती है मेरी, दिल भी है बे-क़रार-ए-मदीनाकर रहा हूँ मैं रोज़-ए-जनम से आज तक इंतिज़ार-ए-मदीना

है तसव्वुर में वो आशकारा, ढूँडता हूँ हरम का नज़ाराया ख़ुदा ! अब तो कर दे मुयस्सर, क़ुर्बत-ए-ताजदार-ए-मदीना

सब्ज़ गुंबद के साए में जाऊँ, हाल-ए-दिल अपना उन को सुनाऊँदो इजाज़त यहीं नौकरी की, जान-ओ-दिल है निसार-ए-मदीना

छोड़ कर इस ज़माने की ठोकर, उन के दर का मैं बन जाऊँ नौकरबादशाही समझता हूँ अपनी, हो लक़ब ख़ाकसार-ए-मदीना

सा'अत-ए-सफ़र आती नहीं है, याद आए तो जाती नहीं हैग़म दिलों से सिमटता नहीं है, 'उम्र-भर सोगवार-ए-मदीना

कब मदीने का ज़ाइर बनूँगा, सू-ए-बतहा मैं, ताहिर ! चलूँगाहम-नशीं जब मुझे यूँ कहेगा, सामने है दियार-ए-मदीना

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