नात लिरिक्स

Tu Murad-e-Kibriya Tu Kamal-e-Ambiya Tu Imam-al-Mursaleen

तू मुराद-ए-किब्रिया तू कमाल-ए-अंबिया तू इमाम-अल-मुर्सलीं

नात ख़्वान: उम्म-ए-हफ़्सशायर: ज़हीर उस्मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा !मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा !

तू मुराद-ए-किब्रिया, मौला ! तू कमाल-ए-अंबिया, मौला !तू इमाम-अल-मुर्सलींतू चुनीदा मुस्तफ़ा ! तू ख़ुदा का लाडलातू हमारा दिल-नशीं

तू ही रहबर मुक़्तदा, तू हमारा पेशवातेरे दर से ही जुड़ा है हर किसी का वासितातू ही अव्वल आख़िरीं, तू सभी में बेहतरींतेरी निस्बत से बने हैं आसमाँ और ये ज़मीं

तू मुराद-ए-किब्रिया, मौला ! तू कमाल-ए-अंबिया, मौला !तू इमाम-अल-मुर्सलींतू चुनीदा मुस्तफ़ा ! तू ख़ुदा का लाडलातू हमारा दिल-नशीं

रब से पाए तू ख़िताब, तू सभी में ला-जवाबरब त'आला से मिला तू 'अर्श जा कर बे-हिजाबतेरी रहमत बे-हिसाब, रब का तू है इंतिख़ाबतेरी ता'रीफ़ों से पुर है रब त'आला की किताबहै कहीं पर वज़्ज़ुहा, तू ही है बदरुद्दुजातू ही है नूर-उल-हुदा, ऐ हमारे मुस्तफ़ा !

तू मुराद-ए-किब्रिया, मौला ! तू कमाल-ए-अंबिया, मौला !तू इमाम-अल-मुर्सलींतू चुनीदा मुस्तफ़ा ! तू ख़ुदा का लाडलातू हमारा दिल-नशीं

हर जगह तेरा है नाम, तुझ पे जारी है सलामहर किसी को मिल रहा है जो दिया तू ने पयामतू ही सब से मोहतरम, तेरा ही तो है करमतेरे सदक़े जी रहे हैं, ऐ शहंशाह-ए-हरम !है ख़याल से मावरा शान तेरी बा-ख़ुदातुझ से वाबस्ता रहूँ, है मेरी ये इल्तिजा

तू मुराद-ए-किब्रिया, मौला ! तू कमाल-ए-अंबिया, मौला !तू इमाम-अल-मुर्सलींतू चुनीदा मुस्तफ़ा ! तू ख़ुदा का लाडलातू हमारा दिल-नशीं

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