नात लिरिक्स

Tamanna Dil Ki Hai Ab To Diyar-e-Mustafa Dekhun | Madine Ka Shahar Dekhun Madine Ki Fiza Dekhun

तमन्ना दिल की है अब तो दियार-ए-मुस्तफ़ा देखूँ | मदीने का शहर देखूँ मदीने की फ़िज़ा देखूँ

नात ख़्वान: ज़हीर उस्मानीशायर: ज़हीर उस्मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सोज़-ए-दिल चाहिए, चश्म-ए-नम चाहिएजीने को अब मुझे बस हरम चाहिए

प्यास बुझती नहीं, दिल सँभलता नहींजाम-ए-ग़म का ये बादल सिमटता नहीं

दूरियाँ ख़त्म होंगी ये कब, या ख़ुदा !सफ़र तयबा का हो मेरा अब, या ख़ुदा !

देख लूँ मैं नबी का वो शहर-ओ-चमनले के कब से मैं बैठा हूँ दिल में लगन

ख़्वाहिश-ए-नफ़्स पूरी हो जाए मेरीदूर अब, या ख़ुदा ! दिल की हो अँधेरी

तमन्ना दिल की है अब तो दियार-ए-मुस्तफ़ा देखूँमदीने का शहर देखूँ, मदीने की फ़िज़ा देखूँ

जहाँ पर नूर की बारिश, मलाइक का बसेरा हैजहाँ पुर-नूर है मंज़र, हर एक पल में सवेरा हैजहाँ पर ने'मतों की आसमानों से रवानी हैवहाँ जा कर मैं आँखों से नवाज़िश बे-बहा देखूँ

तमन्ना दिल की है अब तो दियार-ए-मुस्तफ़ा देखूँमदीने का शहर देखूँ, मदीने की फ़िज़ा देखूँ

मु'अत्तर है फ़ज़ा-ए-चार-सू रहमत की बारिश हैदु'आ मंज़ूर हो, पूरी जहाँ हर एक ख़्वाहिश हैवो जिस शहर-ए-मोहब्बत में मेरे आक़ा की बस्ती हैपहुँच कर उस मुक़द्दस शहर की आब-ओ-हवा देखूँ

तमन्ना दिल की है अब तो दियार-ए-मुस्तफ़ा देखूँमदीने का शहर देखूँ, मदीने की फ़िज़ा देखूँ

मुक़द्दर का सितारा अब मदीने पाक ले जाएमेरी तक़दीर में बतहा की बस्ती को लिखा जाएदु'आ-ओ-'अर्ज़ है, या रब ! मुझे ले चल मदीने मेंतड़प है, जल्द इस चाहत को मैं पूरा हुआ देखूँ

तमन्ना दिल की है अब तो दियार-ए-मुस्तफ़ा देखूँमदीने का शहर देखूँ, मदीने की फ़िज़ा देखूँ

जनम से चाहतें दिल की जुड़ीं उन के मदीने सेमोहब्बत शहर-ए-आक़ा की बसा रक्खी है सीने मेंन बस्ती है कोई ऐसी, न कोई शहर ऐसा हैमैं दुनिया भर के शहरों से शहर जा कर जुदा देखूँ

तमन्ना दिल की है अब तो दियार-ए-मुस्तफ़ा देखूँमदीने का शहर देखूँ, मदीने की फ़िज़ा देखूँ

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