नात लिरिक्स

Unki Rahmat Se Talabgar Chala Jayega

उन की रहमत से तलबगार चला जाएगा

नात ख़्वान: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उन की रहमत से तलबगार चला जाएगावो बुलाएँ तो गुनहगार चला जाएगा

शहर-ए-मक्का से मदीने की तरफ़ जाना हैआप हों जिस के मददगार चला जाएगा

इस लिए नज्दी वहाबी से नहीं मिलता मैंमेरे सीने से तेरा प्यार चला जाएगा

हिन्द में रह के मदीने की तरफ़ देखता हूँदूर रहता हूँ तो क्या प्यार चला जाएगा

जागती आँखों से देखा है मदीना जिस नेकौन कहता है कि वो नार चला जाएगा

ख़ुल्द के सारे ही दरवाज़े खुलेंगे उस परतयबा हो कर जो वफ़ादार चला जाएगा

ये ग़म-ए-'इश्क़-ए-नबी है इसे अंदर रखिएफिर न लौटेगा जो इक बार चला जाएगा

इक मुहम्मद की अगर बात हटा ली जाएज़ात-ए-इंसान का मे'यार चला जाएगा

आप के रौज़े पे आता हूँ तो शर्म आती हैदूर ही से ये गुनहगार चला जाएगा

सर उठाने का तसव्वुर है यहाँ बे-अदबीसर झुका कर ये गुनहगार चला जाएगा

हिज्र-ए-तयबा का तसव्वुर है क़यामत जैसामर के लौटेगा जो इक बार चला जाएगा

गर तेरे नाम पे मरने को बुलाया जाएजो तेरा होगा सर-ए-दार चला जाएगा

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।