नात लिरिक्स

Tu Shah-e-Khuban Tu Jaan-e-Jaanan Hai Chehra Umm-ul-Kitab Tera

तू शाह-ए-ख़ूबाँ तू जान-ए-जानाँ है चेहरा उम्म-उल-किताब तेरा

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: अल्लामा साइम चिश्तीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तू शाह-ए-ख़ूबाँ, तू जान-ए-जानाँ, है चेहरा उम्म-उल-किताब तेरान बन सकी है, न बन सकेगा, मिसाल तेरी, जवाब तेरा

तू सब से अव्वल, तू सब से आख़िर, मिला है हुस्न-ए-दवाम तुझ कोहै 'उम्र लाखों बरस की तेरी, मगर है ताज़ा शबाब तेरा

है कितना ख़ुल्क़-ए-'अज़ीम तेरा, है कितना लुत्फ़-ए-'अमीम तेराहुवा न जाँ के भी दुश्मनों पर, शह-ए-दो-'आलम ! 'इताब तेरा

हो मुश्क-ओ-'अंबर या बू-ए-जन्नत, नज़र में उस की हैं बे-हक़ीक़तमिला है जिस को, मला है जिस ने, पसीना रश्क-ए-गुलाब तेरा

मैं तेरे हुस्न-ए-बयाँ के सदक़े, मैं तेरी मीठी ज़ुबाँ के सदक़ेब-रंग-ए-ख़ुश्बू दिलों में उतरा, है कितना दिलकश ख़िताब तेरा

मैं तेरे हुस्न-ए-बयाँ के सदक़े, मैं तेरी मीठी ज़ुबाँ के सदक़ेजो नूर बन कर दिलों में उतरा, है कितना दिलकश ख़िताब तेरा

ख़ुदा की ग़ैरत ने डाल रखे हैं तुझ पे सत्तर हज़ार पर्देजहाँ में बन जाते तूर लाखों, जो इक भी उठता हिजाब तेरा

ख़ुदा की कुदरत ने डाल रखे हैं तुझ पे सत्तर हज़ार पर्देजहाँ में लाखों ही तूर बनते, जो इक भी उठता हिजाब तेरा

है तू भी, साइम ! 'अजीब इंसाँ, जो रोज़-ए-महशर से है हिरासाँअरे ! तू जिन की है ना'त पढ़ता, वही तो लेंगे हिसाब तेरा

है तू भी, साइम ! 'अजीब इंसाँ, जो ख़ौफ़-ए-महशर से है हिरासाँअरे ! तू जिन की है ना'त पढ़ता, वही रखेंगे हिजाब तेरा

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