नात लिरिक्स

Apni Rahmat Ke Samundar Mein Utar Jaane De

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: मुज़फ़्फ़र वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने देबे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

न मैं तख़्त मंगाँ, न मैं ताज मंगाँन मैं मंगदी हाँ मैनूँ ज़र मिल जाए

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

सू-ए-बतहा लिए जाती है हवा-ए-बतहाबू-ए-दुनिया ! मुझे गुमराह न कर, जाने दे

बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

तेरी सूरत की तरफ़ देख रहा हूँ, आक़ा !पुतलियों को इसी मर्कज़ पे ठहर जाने दे

बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

ख़्वाहिश-ए-ज़ात ! बहुत साथ दिया है तेराअब जिधर मेरे मुहम्मद हैं उधर जाने दे

बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

ज़िंदगी ! गुम्बद-ए-ख़ज़रा ही तो मंज़िल है मेरीमुझ को हरियालियों में ख़ाक-बसर जाने दे

बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

मौत पर मेरी शहीदों को भी रश्क आएगाअपने क़दमों से लिपट कर मुझे मर जाने दे

बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

रोक, रिज़वाँ ! न मुज़फ़्फ़र को दर-ए-जन्नत परये मुहम्मद का है मंज़ूर-ए-नज़र, जाने दे

बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे

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