नात लिरिक्स

Ja Kar Koi Taiba Mein Ye Aaqa Ko Bataye

जा कर कोई तयबा में ये आक़ा को बताए

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: मलिक अदनान अहमद और अन्यउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जा कर कोई तयबा में ये आक़ा को बताएगुज़रे हुए लम्हों की बहुत याद सताए

मत छेड़, सबा ! मुझ को अभी ज़ख़्म हरे हैंऐसा न हो फिर आँख से आँसू निकल आए

दुनिया में फ़क़त आप की हस्ती है वो हस्तीजिस से कि उजाला ही उजाला नज़र आए

फिर माँ सी मुझे गोद की ठंडक हुई हासिलहै याद मुझे,गुंबद-ए-ख़ज़रा ! तेरे साए

मुजरिम हूँ, चला आया हूँ मैं आप के दर परबिन आप के मुजरिम को भला कौन बचाए

जब से सू-ए-बतहा का ये शैदाई हुआ हैतब से दिल-ए-बेताब कहीं चैन न पाए

मुझ से कोई ये माल, ये दौलत सभी ले करलौटा दे वो पल जो थे मदीने में बिताए

फिर आए बुलावा मुझे दरबार-ए-नबी सेअल्लाह कभी ख़ैर से ये दिन भी दिखाए

ईमान किसी शख़्स का कामिल नहीं होताजब तक कि वो सरकार पे ईमान न लाए

अहमद रहे ता-'उम्र इसी दर का ही नौकरऐ काश ! इसी दर पे इसे मौत भी आए

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