नात लिरिक्स

Jo Aastan Se Tere Lau Lagaye Baithe Hain

जो आस्ताँ से तेरे लौ लगाए बैठे हैं

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो आस्ताँ से तेरे लौ लगाए बैठे हैंख़ुदा गवाह, ज़माने पे छाए बैठे हैं

जो आस्ताँ से तेरे लौ लगाए बैठे हैंख़ुदा गवाह, वो दुनिया पे छाए बैठे हैं

हज़ारों अहल-ए-नज़र दिल लुटाए बैठे हैंवो आज बज़्म में महशर उठाए बैठे हैं

चमक रही हैं जबीनें तेरे फ़क़ीरों कीतजल्लियात के सेहरे सजाए बैठे हैं

ख़ुदा के वास्ते अब खोल उन पे बाब-ए-'अताजो देर से तेरी चौखट पे आए बैठे हैं

जलाएगी उन्हें अब क्या चमन में बर्क़-ए-फ़लकजो आशियाना-ए-हस्ती जलाए बैठे हैं

बड़े बड़ों के सरों से उतर रहा है ख़ुमारवो आज ख़ैर से महफ़िल पे छाए बैठे हैं

जहाँ भी जाइए उन के सितम का चर्चा हैवो सारी ख़ल्क़ में तूफ़ाँ उठाए बैठे हैं

मजाल है जो कोई लब हिले सर-ए-महफ़िलवो एक एक को आँखें दिखाए बैठे हैं

ये एक हम हैं कि अपनों के दिल न जीत सकेवो दुश्मनों को भी अपना बनाए बैठे हैं

अजल भी हम को उठाए पे अब नहीं क़ादिरयहाँ हम आज किसी के बिठाए बैठे हैं

वफ़ा के नाम पे दुश्मन का इम्तिहाँ भी सहीकि दोस्तों को तो हम आज़माए बैठे हैं

नसीर ! हम में तो अपनों की कोई बात नहींकरम है उन का, जो अपना बनाए बैठे हैं

जो उन के ज़िक्र की महफ़िल सजाए बैठे हैंदिलों को अपने मदीना बनाए बैठे हैं

जिन्हें तुम्हारी मोहब्बत ने सरफ़राज़ कियातुम्हारे नाम पे सब कुछ लुटाए बैठे हैं

ये कह गया है कोई आ के मेरे कानों मेंनज़र से देख वो सरकार आए बैठे हैं

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