नात लिरिक्स

Balaghal Ula Bikamalihi | Main Buron Se Lakh Bura Sahi

बलग़ल उला बि-कमालिही | मैं बुरों से लाख बुरा सही

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

मैं बुरों से लाख बुरा सही, मगर उन से है मेरा वास्तामेरी लाज रखना, मेरे ख़ुदा ! ये तेरे हबीब की बात है

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

जिसे चाहा दर पे बुला लिया, जिसे चाहा अपना बना लियाये बड़े करम के हैं फ़ैसले, ये बड़े नसीब की बात है

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

न कहीं से दूर हैं मंज़िलें, न कोई क़रीब की बात हैजिसे चाहे उस को नवाज़ दे, ये दर-ए-हबीब की बात है

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

आवे कर्मां वाली जे ओ घड़ी, फिराँ मैं मदीने गली गलीकदी साडी वी होवे हाज़री, कोई साडे लई वी दु'आ करे

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

वो कमाल-ए-हुस्न-ए-हुज़ूर है कि गुमान-ए-नक़्स जहाँ नहींयही फूल ख़ार से दूर है, यही शम'अ है कि धुवाँ नहीं

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

करूँ तेरे नाम पे जाँ फ़िदा, न बस एक जाँ दो जहाँ फ़िदादो जहाँ से भी नहीं जी भरा, करूँ क्या करोड़ों जहाँ नहीं

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

करूँ मदह-ए-अहल-ए-दुवल, रज़ा ! पड़े इस बला में मेरी बलामैं गदा हूँ अपने करीम का, मेरा दीन पारा-ए-नाँ नहीं

बलग़ल-'उला बि-कमालिहीकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहीहसुनत जमी'उ ख़िसालिहीसल्लू 'अलैहि व आलिही

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