नात लिरिक्स

Ik Shab-e-Taar Hai | Bepanah Pyar Hai | Nazm - Iz Huma Fil-Ghaar

इक शब-ए-तार है | बेपनाह प्यार है | नज़्म - इज़ हुमा फ़िल-ग़ार

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: नादिर सिद्दीक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इक शब-ए-तार हैऔर इक ग़ार हैऔर इस ग़ार मेंएक सच्चा है और एक सच्चाई हैइक मोहब्बत है और एक हुब-दार हैबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार हैमेरे सिद्दीक़ काअपने महबूब सेबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार है

हिजरत की रात ही न फ़क़त हम-सफ़र रहेसिद्दीक़ हम-रिकाब-ए-नबी 'उम्र-भर रहे

ऐसा नहीं कि सिर्फ़ रहे ज़िंदगी में साथअब भी हैं उन के साथ ये मद्द-ए-नज़र रहे

इक शब-ए-तार हैऔर इक ग़ार हैऔर इस ग़ार मेंएक सच्चा है और एक सच्चाई हैइक मोहब्बत है और एक हुब-दार हैबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार हैमेरे सरकार काअपने अल्लाह सेबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार है

नबियों के बा'द ख़ल्क़ में अफ़ज़ल-तरीन हैसुल्तान-ए-काइनात का वो जा-नशीन है

वो यार-ए-ग़ार भी है रफ़ीक़-ए-मज़ार भीफ़ैज़ान ! उस की ज़ात वफ़ा की अमीन है

इक शब-ए-तार हैऔर इक ग़ार हैऔर इस ग़ार मेंएक सच्चा है और एक सच्चाई हैइक मोहब्बत है और एक हुब-दार हैबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार हैमेरे सिद्दीक़ काअपने महबूब सेबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार है

लेकिन उस ग़ार के कोने-खुदरे में मौजूद इक साँप सेये तक़र्रुब का मंज़र न देखा गयाशोख़ ने डस लियासाँप ने डस लियासाँप के ज़हर से ज़ब्त सिद्दीक़-ए-अकबर का टूटा मगरसाँप को क्या ख़बर ?उस की तर आँख सेउन के रुख़्सार तकनुक़रई आब काउन के रुख़्सार तकमहरम-ए-ख़्वाब तकजो सफ़र हो गयामो'तबर हो गया

इक शब-ए-तार हैऔर इक ग़ार हैऔर इस ग़ार मेंएक सच्चा है और एक सच्चाई हैइक मोहब्बत है और एक हुब-दार हैबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार हैमेरे सरकार काअपने अल्लाह सेबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार है

दौलत-ए-दो-जहाँजल्वा-पैरा हुईफ़ैज़-फ़रमा हुईइस पे शाहिद है नूरानी फ़रमान भीरब का क़ुरआन भी

इक शब-ए-तार हैऔर इक ग़ार हैऔर इस ग़ार मेंएक सच्चा है और एक सच्चाई हैइक मोहब्बत है और एक हुब-दार हैबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार हैमेरे सिद्दीक़ काअपने महबूब सेबे-पनाह प्यार हैबे-पनाह प्यार है

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