नात लिरिक्स

Hai Itni Shadeed Ab To Tamanna-e-Madina | Har Sans Se Aati Hai Sada Hae Madina | Madina Madina

है इतनी शदीद अब तो तमन्ना-ए-मदीना | हर साँस से आती है सदा हाए मदीना | मदीना मदीना

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: मुहम्मद हनीफ़ नाज़िशउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीना मदीना मदीना मदीना !मदीना मदीना मदीना मदीना !

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

मदीना मदीना !

है इतनी शदीद अब तो तमन्ना-ए-मदीनाहर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

मदीना मदीना !

इस ने भी मदीना देख लिया, उस ने भी मदीना देख लियावो दिन भी तो आए मैं भी कहूँ, मैं ने भी मदीना देख लिया

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

ऐ बाद-ए-सबा ! पैग़ाम मोरा, सुल्तान-ए-मदीना को दीजो

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

मदीना मदीना ! मदीना मदीना !मदीना मदीना मदीना मदीना !

कोई पर्दे छलियाँ दे, कोई पर्दे छलियाँ देरस्ते नैं भुल दे तयबा दियाँ गलियाँ दे

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

जिंद गोर गुमावाँ मैं, जिंद गोर गुमावाँ मैंहिक वारी सद सोहणिया ! फिर मुड़ के न आवाँ मैं

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

मिट्टी पाक मदीने दी, मिट्टी पाक मदीने दीअखियाँ दा सुरमा ए सानूँ ख़ाक मदीने दी

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

क्या बात ख़ज़ीने दी, क्या बात ख़ज़ीने दीसारा जग खाँदा ए ख़ैरात मदीने दी

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

होवे ख़ैर सफ़ीने दी, होवे ख़ैर सफ़ीने दीमाण ग़ुलामाँ दा वसे झोक मदीने दी

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

मदीना मदीना मदीना मदीना !मदीना मदीना मदीना मदीना !

आक़ा मेरे आक़ा ! मुझे तयबा में बुला लोसोने नहीं देती है तमन्ना-ए-मदीना

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

जागूँ तो इसी धुन में रहूँ रात गए तकसो जाऊँ तो ख़्वाबों में नज़र आए मदीना

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

मत और किसी शहर की रूदाद सुनाओशैदा-ए-मदीना हूँ, मैं शैदा-ए-मदीना

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

मक्का ! तू भी अफ़ज़ल है मगर इतना बता देहर शहर से बढ़ कर मुझे क्यूँ भाए मदीना !

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

हो जाए 'अता रख़्त-ए-सफ़र, इज़्न-ए-सफ़र भीहो जाए करम मुझ पे अब, आक़ा-ए-मदीना !

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

फूलों से भी वो ख़ार हैं बेहतर, तो करे कौनअंदाज़ा-ए-रा'नाई-ए-गुलहा-ए-मदीना

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

ख़्वाहिश है कि अब जा के न लौटूँ मैं वहाँ सेनाज़िश ! मुझे तक़दीर जो दिखलाए मदीना

हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना !

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