नात लिरिक्स

Tu Sab Ko Hajj Pe Bula Raha Hai | Mujhe Bhi Hajj Pe Bula Le Maula

तू सब को हज पे बुला रहा है | मुझे भी हज पे बुला ले मौला

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तू सब को हज पे बुला रहा हैमुझे भी हज पे बुला ले, मौला !तुझे मुहम्मद का वासिता हैमुझे भी हज पे बुला ले, मौला !

ज़बाँ पे लब्बैक की सदा होकरूँ हरम का तवाफ़ मैं भीयही तमन्ना है मेरे दिल कीये इज़्न मुझ को भी दे, ख़ुदाया !

हो सामने तेरा प्यारा का'बापियूँ मैं ज़मज़म का जाम, मौला !शरफ़ 'अता कर मुझे भी, मौला !है वासिता तुझ को मुस्तफ़ा का

ग़िलाफ़-ए-का'बा से मैं लिपट करदु'आएँ माँगूँ मैं ख़ूब रोऊँमु'आफ़ी माँगूँ मैं तुझ से, मौला !तू बख़्श देना मुझे, ख़ुदाया !

मिना-ओ-मुज़्दलिफ़ा और 'अरफ़ात -के भी जल्वों को देखूँ, मौला !करम ये फ़रमा दे तुझ को, मौला !है वासिता बिन्त-ए-मुस्तफ़ा का

मैं चूमूँ प्यारा वो संग-ए-अस्वदमुझे भी हासिल हो ये स'आदतऐ ख़ालिक़-ए-कुल ऐ मालिक-ए-कुल !ये पूरी कर दे मेरी तमन्ना

हरम से हो कर मदीने जाऊँजहाँ पे सरदार-ए-दो-जहाँ हैंपकड़ के उन की सुनहरी जालीतलब करूँ सदक़ा पंजतन का

है आरज़ू उन के दर पे जाऊँमैं हाल दिल का उन्हें बताऊँजब उन की चौखट पे सर को रक्खूँहो ख़ातिमा मेरी ज़िंदगी का

शरफ़ दे शौक़-ए-फ़रीदी को भीदर-ए-शह-ए-दीं पे हाज़िरी काहै वासिता तुझ को, मेरे मौला !नबी-ए-अकरम के लाडलों का

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