नात लिरिक्स

Teri Jaaliyon Ke Neeche, Teri Rahmaton Ke Saae

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साए

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: मुहम्मद अली ज़हूरीउपलब्ध: हिंदी

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साएजिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

न ये बात शान से है, न ये बात माल-ओ-ज़र कीवो ही जाता है मदीने, आक़ा जिसे बुलाए

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साएजिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

कैसी वहाँ की रातें, कैसी वहाँ की बातेंउन्हें पूछ लो नबी का जो मदीना देख आए

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साएजिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

रोज़े के सामने मैं ये दुआएँ माँगता थामेरा दम निकल तो जाए, ये समां बदल न जाए

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साएजिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

तयबा के जाने वाले ! तुझे देता हूँ सदाएँदर-ए-मुस्तफ़ा पे जा के तू जहाँ को भूल जाए

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साएजिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

लो चला हूँ मैं लहद में, मेरे मुस्तफ़ा से कह दोके हवा तेरी गली की मुझे छोड़ने को आए

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साएजिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

वो ज़हूरी ! यार मेरा, वो ही ग़म-गुसार मेरामेरी क़ब्र पर जो आ के नात-ए-नबी सुनाए

तेरी जालियों के नीचे, तेरी रहमतों के साएजिसे देखनी हो जन्नत वो मदीना देख आए

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