नात लिरिक्स

Tere Daman-e-Karam Mein Jise Neend Aa Gai Hai

तेरे दामन-ए-करम में जिसे नींद आ गई है

नात ख़्वान: क़ारी रिज़वान ख़ानशायर: अख़्तर रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तेरे दामन-ए-करम में जिसे नींद आ गई हैजो फ़ना न होगी ऐसी उसे ज़िंदगी मिली है

मुझे क्या पड़ी किसी से करूँ 'अर्ज़ मुद्द'आ मैंमेरी लौ तो बस उन्हीं के दर-ए-जूद से लगी है

वो जहान भर के दाता मुझे फेर देंगे ख़ालीमेरी तौबा, ऐ ख़ुदा ! ये मेरे नफ़्स की बदी है

जो प-ए-सवाल आए, मुझे देख कर ये बोलेइसे चैन से सुलाओ कि ये बंदा-ए-नबी है

मैं मरुँ तो, मेरे मौला ! ये मलाइका से कह देंकोई इस को मत जगाना, अभी आँख लग गई है

मैं गुनाहगार हूँ और बड़े मर्तबों की ख़्वाहिशतू मगर करीम है ख़ू तेरी बंदा-परवरी है

तेरी याद थपकी दे कर मुझे अब, शहा ! सुला देमुझे जागते हुए यूँ बड़ी देर हो गई है

ऐ नसीम-ए-कू-ए-जानाँ ! ज़रा सू-ए-बद-नसीबाँचली आ, खुली है तुझ पे जो हमारी बेकसी है

तेरा दिल-शिकस्ता अख़्तर इसी इंतिज़ार में हैकि अभी नवीद-ए-वसलत तेरे दर से आ रही है

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