नात लिरिक्स

Dil Dard Se Bismil Ki Tarah Lot Raha Ho

दिल दर्द से बिस्मिल की तरह लोट रहा हो

नात ख़्वान: क़ारी रिज़वान ख़ानशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दिल दर्द से बिस्मिल की तरह लोट रहा होसीने पे तसल्ली को तेरा हाथ धरा हो

गर वक़्त-ए-अजल सर तेरी चौखट पे झुका होजितनी हो क़ज़ा एक ही सज्दे में अदा हो

आता है फ़क़ीरों पे उन्हें प्यार कुछ ऐसाख़ुद भीक दें और ख़ुद कहें मँगता का भला हो

मँगता तो है मँगता, कोई शाहों में दिखा देजिस को मेरे सरकार से टुकड़ा न मिला हो

क्यूँ अपनी गली में वो रवादार-ए-सदा होजो भीक लिए राह-ए-गदा देख रहा हो

ये क्यूँ कहूँ मुझ को ये 'अता हो, ये 'अता होवो दो कि हमेशा मेरे घर-भर का भला हो

मिट्टी न हो बर्बाद पस-ए-मर्ग, इलाही !जब ख़ाक उड़े मेरी मदीने की हवा हो

अल्लाह का महबूब बने जो तुम्हें चाहेउस का तो बयाँ ही नहीं कुछ तुम जिसे चाहो

ढूँढा ही करे सद्र-ए-क़यामत के सिपाहीवो किस को मिले जो तेरे दामन में छुपा हो

देखा उन्हें महशर में तो रहमत ने पुकाराआज़ाद है जो आप के दामन से बँधा हो

शाबाश, हसन ! और चमकती सी ग़ज़ल पढ़दिल खोल कर आईना-ए-ईमाँ की जिला हो

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